ना मिलने की है इच्छा
ना ही है देखने कि चाहत
ये कैसा तुम्हारा इष्क है
ना mehsoos होता है ,ना ही तुम जताते हो
मेरी नाराजगी से ना तुम्हे कोई fark पडता है
ना मुझे मनाने का कभी इरादा होता है
ये कैसा तुम्हारा इष्क है
चल रही है तुम्हारी
जिंदगी मेरे बिना
क्यु main ही परेशान हू
तुम्हारी berukhi से