Monday, December 23, 2024

ख्वाहिषे

मेरी ख्वहिषे ही क्या बया करू..
जिन्हे मुकम्मल जगह नही मिलती..

मेरे इरादे क्या ही अब बया करू..
जो कभी पुरे नही होते..

है कुछ मेरा ऐसा नसिब 
जो मुझे पुरा नही करता

हुं अभी भी ऊस इंतेझार मे
की मेरा कोई सपना बने

-- ऋतुजा

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